पुत्रदा एकादशी पर 3 दुर्लभ संयोग... करें इस विधि से पूजा! पुत्र रत्न की होगी प्राप्ति
इस बार पुत्रदा एकादशी पर रवि योग, सिद्ध योग, और भद्रावास योग जैसे दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं. इन योगों में लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से संतान की सुख-समृद्धि और वंश वृद्धि का वरदान मिलता है.
सनातन धर्म में पौष का महीना बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस महीने कई प्रमुख व्रत और त्योहार भी मनाए जाते हैं .जिसमें से एक पुत्रदा एकादशी भी होता है. यह पर्व भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है. इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना का विधान है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन जगतपति भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा आराधना करने से संतान प्राप्ति होती है. साथ ही जीवन में चल रही तमाम तरह की परेशानियों से मुक्ति भी मिलती है. तो चलिए जानते हैं कब है पुत्रदा एकादशी का व्रत क्या है शुभ मुहूर्त .
अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार पौष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह 7:50 से शुरू होकर 31 दिसंबर को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी. ऐसी स्थिति में 30 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. तो दूसरी तरफ वैष्णजन 31 दिसंबर को एकादशी का पर्व मनाएंगे.
ज्योतिष गणना के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है. जिसमें रवि योग, भद्रवास योग, लक्ष्मी नारायण योग का संयोग बन रहा है. इस योग के दौरान लक्ष्मी नारायण की पूजा आराधना करने से सुख समृद्धि और खुशहाली की वृद्धि होगी.
ज्योतिष गणना के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है. जिसमें रवि योग, भद्रवास योग, लक्ष्मी नारायण योग का संयोग बन रहा है. इस योग के दौरान लक्ष्मी नारायण की पूजा आराधना करने से सुख समृद्धि और खुशहाली की वृद्धि होगी.
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