सोम कंपनी के गुनाहों पर कौन डाल रहा है पर्दा ? अफसर बर्खास्त लेकिन लाइसेंस सुरक्षित
सोम कंपनी के गुनाहों पर कौन डाल रहा है पर्दा ? अफसर बर्खास्त लेकिन लाइसेंस सुरक्षित
इंदौर/भोपाल | मध्यप्रदेश की बहुचर्चित सोम कंपनी से जुड़ा आपराधिक मामला एक बार फिर प्रशासनिक और न्यायिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। देपालपुर, जिला इंदौर स्थित माननीय अपर सत्र न्यायालय ने 23 दिसंबर 2023 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आबकारी विभाग की अधिकारी और सोम डीसलरीज के निदेशकों को गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया था।
न्यायालय का स्पष्ट फैसला
अदालत ने तत्कालीन आबकारी उप निरीक्षक श्रीमती प्रीति गायकवाड़ को सोम डीसलरीज के निदेशकों के साथ आई पी सी की धारा 420, 468, 471 और 120B के तहत दोषी करार दिया।
सभी दोषियों को तीन वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1000 का अर्थदंड सुनाया गया।
अधिकारी पर कार्रवाई, डिस्टिलरी पर चुप्पी
फैसले के बाद मध्यप्रदेश शासन ने 25 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर श्रीमती प्रीति गायकवाड़ को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
हालांकि, हाईकोर्ट इंदौर ने 24 जनवरी 2024 को केवल सजा पर अमल को स्थगित किया था, न कि Conviction को।
जब श्रीमती गायकवाड़ ने दोष सिद्धि (Conviction) को निलंबित करने के लिए एप्लीकेशन नंबर 1968/2025 दायर की, तो 10 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
सोम डीसलरीज के निदेशक अब भी ‘क्लीन’?
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन धाराओं में सरकारी अधिकारी को दोषी मानते हुए बर्खास्त किया गया, उन्हीं धाराओं में सोम डीसलरीज के निदेशकों को भी सजा सुनाई गई, फिर भी
👉 डिस्टिलरी का लाइसेंस आज तक रद्द नहीं हुआ।
👉 मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 31(1)(d) के तहत लाइसेंस निरस्तीकरण की कोई कार्रवाई नहीं।
कानून क्या कहता है?
कानूनी जानकारों के अनुसार, जब किसी डिस्टिलरी के डायरेक्टर्स की Conviction बरकरार है और उन्होंने अब तक Suspension of Conviction के लिए हाईकोर्ट से राहत नहीं ली है, तो लाइसेंस का स्वतः निरस्त होना अनिवार्य है।
तो फिर दो साल की देरी क्यों?
करीब दो वर्ष बीत जाने के बावजूद सोम डीसलरीज के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है
क्या आबकारी विभाग पर दबाव है?
क्या रसूखदार शराब कारोबारियों के लिए नियम अलग हैं?
क्या सिस्टम सिर्फ छोटे अफसरों पर ही सख्त होता है?
सिस्टम की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल
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