होटल और ढाबों पर शराब बेचने के लिए करते है मजबूर 

पंकज सिंह भदौरिया भोपाल। मध्यप्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ी सोम कम्पनी को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सोम कम्पनी के दबाव में आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी काम कर रहे हैं और हालात यह हैं कि कम्पनी से जुड़े कथित गुंडे आबकारी सर्च टीम को भी दिशा-निर्देश देते नजर आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि शहर में सोम कम्पनी की 67 शराब दुकानें संचालित हो रही हैं, वहीं प्रदेश के कई जिलों में भी कम्पनी का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है। कम्पनी ने अलग-अलग क्षेत्रों में मैनेजर तैनात कर रखे हैं, जिन पर शराब बिक्री का कड़ा टारगेट दिया जाता है।

 टारगेट पूरा करने के लिए ढाबों-होटलों पर दबाव! 

आरोप है कि इसी टारगेट के चलते सोम कम्पनी की टीम ढाबों और होटलों पर दबिश देकर जबरन शराब रखने और बेचने का दबाव बना रही है। कई होटल संचालकों का कहना है कि कम्पनी के मैनेजर सीधे तौर पर धमकाने की भाषा में बात करते हैं।

 आबकारी अधिकारियों को ‘आदेशात्मक’ फोन? 

सूत्रों का दावा है कि सोम कम्पनी के मैनेजर आबकारी सब-इंस्पेक्टर और एडीओ को सीधे आदेशात्मक फोन करते हैं। यदि कोई अधिकारी इन बातों को मानने से इनकार करता है तो कम्पनी में बैठा अनिल नामक व्यक्ति ऊपर से फोन लगवाता है, जिसके बाद आबकारी टीम सक्रिय हो जाती है।

 गुंडे आगे-आगे, आबकारी टीम पीछे-पीछे! 

स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि सोम से जुड़े कथित गुंडे आगे-आगे चलते हैं और आबकारी विभाग की टीम पीछे-पीछे, फिर किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या ढाबे में घुसकर कार्रवाई की जाती है। सड़क पर गाड़ी रोकते समय ये लोग क्राइम ब्रांच बन जाते हैं,होटल-ढाबों में आबकारी अधिकारी,और मार्केट में धौंस जमाने के लिए बड़े नेताओं के पार्टनर होने का दावा करते हैं।

अदालत में हलफनामे पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार, सोम कम्पनी के कथित मालिक जगदीश अरोड़ा और अजय अरोड़ा ने पूर्व में अदालत में डिस्टिलरी और शराब कारोबार से जुड़ाव से इनकार करते हुए हलफनामा दिया, जिसके आधार पर उन्हें राहत मिली। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि कारोबार से कोई संबंध नहीं है, तो प्रदेशभर में सोम का यह नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है?

 खुलेआम बैच चेक, अपनी शराब बेचने का दबाव 

वर्तमान स्थिति में आरोप है कि सोम से जुड़े लोग आबकारी विभाग को ‘उंगलियों पर नचाते हुए’ होटल और ढाबों में शराब की बोतलों का बैच चेक कर रहे हैं और अपनी कम्पनी की शराब रखने व बेचने का खुला दबाव बना रहे हैं।

आबकारी विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

पूरा मामला आबकारी विभाग की भूमिका और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की साख से जुड़ा मामला है।

 इस खबर में लगाए गए आरोप सूत्रों एवं स्थानीय लोगों के बयानों पर आधारित हैं। सोम कम्पनी एवं आबकारी विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।