डॉ. एस.के. शर्मा के नाम से जारी बताई गईं रिपोर्टें ‘फर्जी’; एफआईआर और आर्थिक वसूली की मांग 

 पंकज सिंह भदौरिया,✍️ ख़बर आर टी आई के सबूतों के आधार पर लिखी गई है ✍️

 भोपाल /आयुष्मान भारत निरामय योजना के अंतर्गत उपचार में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। भोपाल स्थित सृष्टि हॉस्पिटल पर आरोप है कि उसने पैथोलॉजी रिपोर्ट में कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर और सील का उपयोग कर शासन को गुमराह किया तथा योजना के तहत भुगतान प्राप्त किया। इस संबंध में शिकायतकर्ता नीरज यादव ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आयुष्मान भारत निरामयम, जिला भोपाल को विस्तृत शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

 इस तरह समझे क्या है पूरा मामला? 

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 में आयुष्मान योजना के अंतर्गत सृष्टि हॉस्पिटल द्वारा जिन मरीजों का उपचार किया गया, उनकी पैथोलॉजी रिपोर्ट पर डॉ. एस. के. शर्मा (एमडी पैथोलॉजिस्ट, पंजीयन क्रमांक MP-30165) के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं।
जब इस संबंध में डॉ. शर्मा से मोबाइल पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी-कभार सृष्टि हॉस्पिटल में विजिटिंग पैथोलॉजिस्ट के रूप में गए हैं, परंतु संबंधित रिपोर्ट उनके द्वारा जारी नहीं की गई,और रिपोर्ट पर अंकित हस्ताक्षर भी उनके नहीं हैं। इस कथन से रिपोर्टों की सत्यता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हस्ताक्षरों में पाई गई भिन्नता,शिकायतकर्ता के अनुसार, सृष्टि हॉस्पिटल की रिपोर्ट और सीटी पैथ लैब की रिपोर्ट पर डॉ. शर्मा के हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया। जानकारी में यह भी सामने आया कि डॉ. शर्मा पूर्णकालिक रूप से सीटी पैथ लैब में कार्यरत हैं तथा शाम के समय (भारत एक्सरे एण्ड पैथोलॉजी लैब ) में सेवाएं देते हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल कार्यालय में भी सृष्टि हॉस्पिटल में उनकी नियमित सेवाओं का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।

 शासन के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई 

मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 29 अप्रैल 2006 के पत्र के अनुसार, कोई भी पैथोलॉजिस्ट अपनी स्वयं की प्रयोगशाला के अतिरिक्त केवल एक अतिरिक्त प्रयोगशाला में विजिटिंग पैथोलॉजिस्ट के रूप में सेवाएं दे सकता है।यदि डॉ. शर्मा के हस्ताक्षर फर्जी पाए जाते हैं, तो न केवल रिपोर्ट कूट रचित मानी जाएंगी, बल्कि उन रिपोर्टों के आधार पर किया गया उपचार और आयुष्मान योजना से प्राप्त भुगतान भी संदिग्ध हो जाएगा।

 शिकायतकर्ता द्वारा जांच के लिए उठाए गए प्रमुख बिंदु 

वर्ष 2024 एवं 2025 में आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपयोग की गई सभी पैथोलॉजी रिपोर्ट की सत्यता की जांच।

डॉ. एस. के. शर्मा के नाम से जारी रिपोर्ट और संबंधित मरीजों की फाइलों की विस्तृत जांच।

फर्जी रिपोर्ट के आधार पर प्राप्त राशि की सृष्टि हॉस्पिटल से वसूली।

एम्पेनलमेंट तिथि से 2025 तक किन-किन पैथोलॉजिस्ट द्वारा रिपोर्ट जारी की गई, इसकी जांच।

 संबंधित पैथोलॉजिस्ट उस अवधि में किन संस्थानों में कार्यरत थे, इसका सत्यापन। 

एफआईआर दर्ज करने की मांग

शिकायतकर्ता ने शासन स्तर से सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने,आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से जांच कराने तथा आयुष्मान योजना के अंतर्गत किए गए सभी उपचारों की पुनः समीक्षा कराने की मांग की है। मामले की प्रतिलिपि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त, प्रमुख सचिव तथा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल को भी प्रेषित की गई है।

आरोप सिद्ध होने पर आरोपियों पर कार्यवाही होगी? 

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल आयुष्मान योजना की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को भी गहरा आघात पहुंचा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करता है।