विवेक तनखा के ट्वीट के बाद बहस , पूर्व में GAD आदेश में भी हो चुका है विधिक अभिमत का हवाला 

 सोम कम्पनी के लाइसेंस निरस्तीकरण आदेश को लेकर आखिर विवाद क्यों? 

✍️पंकज सिंह भदौरिया ✍️

 भोपाल /मध्यप्रदेश के तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने देपालपुर प्रकरण में नकली परमिट और अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर डिस्टिलरी एवं बियर फैक्ट्री के लाइसेंस निरस्त किए जाने का साहसिक कदम उठाया आदेश में महाधिवक्ता के विधिक अभिमत का उल्लेख भी किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा ने ट्वीट कर कहा कि प्रशासनिक आदेश में “अटॉर्नी जनरल की राय” का उल्लेख करना उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि वे पूर्व में एक अन्य मामले में सोम कंपनी की ओर से पैरवी कर चुके हैं।

 जीएडी ने किया था महाधिवक्ता का सुझाव सलग्न 

इससे पहले 2 सितम्बर 2021 को सामान्य प्रशासन विभाग, मध्य प्रदेश ने OBC 27% आरक्षण संबंधी आदेश में भी महाधिवक्ता के अभिमत का हवाला देते हुए महाधिवक्ता के सुझाव की छायाप्रति को संलग्न कर दिया था, जब मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित था। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कंपनी के मालिकान को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निकट माना जाता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। फिलहाल, महाधिवक्ता की राय के उल्लेख को लेकर कानूनी बहस जारी है और मामला न्यायलय के पास सुरक्षित