श्याम सुन्दर शर्मा

“माफिया गिरी के साए में अटका सार्वजनिक परिवहन: 1 अप्रैल से 1000 बसें शुरू करने का आदेश अधर में”

भोपाल। प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को निजीकरण से मुक्त कर शासन के अधीन संचालित करने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल सवालों के घेरे में नजर आ रही है। एक अप्रैल 2026 से राज्य परिवहन निगम के माध्यम से लगभग 1000 ई-बसों के संचालन की तैयारी के बावजूद यह योजना जमीन पर उतरती दिखाई नहीं दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पूर्व में प्रदेश में अन्य राज्यों की तर्ज पर सार्वजनिक परिवहन सेवा को पुनः सरकारी नियंत्रण में लाने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत 1 अप्रैल से ई-बसों के संचालन का आदेश भी जारी किया गया था, ताकि आम जनता को सुलभ, सस्ती और प्रदूषण रहित परिवहन सुविधा मिल सके।
लेकिन हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, परिवहन क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय निजी ऑपरेटरों और कथित प्रभावशाली लोगों के आर्थिक हित इस योजना में बाधा बन रहे हैं। आरोप है कि परिवहन व्यवस्था से जुड़े कुछ उच्च स्तर के जिम्मेदार लोग अप्रत्यक्ष रूप से निजी संचालन से लाभान्वित हो रहे हैं, जिसके चलते सरकारी व्यवस्था को लागू करने में देरी हो रही है।
प्रदेश में पिछले करीब 16 वर्षों से सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह निजी हाथों में संचालित हो रहा है। ऐसे में इसे पुनः सरकारी नियंत्रण में लाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा था। सरकार ने इसके लिए लगभग 1000 ई-वाहनों की व्यवस्था भी कर ली है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों और कथित दबाव के चलते इनका संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। परिवहन व्यवस्था में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल का ठप पड़ना कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था माफिया तंत्र से मुक्त हो पाएगी, या फिर आम जनता को सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?