सरकारी खजाने को भरने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे _ आयुक्त
भोपाल /आबकारी आयुक्त ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के राजस्व लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए विभाग हर संभव प्रयास करेगा। पारदर्शी ई-टेंडर प्रक्रिया, समूहों के वैज्ञानिक पुनर्गठन और प्रतिस्पर्धी बोलियों को प्रोत्साहन के माध्यम से शेष मदिरा दुकानों का निष्पादन तेज़ी से किया जाएगा। आयुक्त ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता सरकारी खजाने को अधिकतम राजस्व से मजबूत करना है, साथ ही निष्पादन प्रक्रिया को निष्पक्ष, व्यवस्थित और पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।
मध्य प्रदेश में मदिरा दुकानों के निष्पादन का 12वां चरण शुरू
मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मदिरा दुकानों के निष्पादन के 12वें चरण की विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है। इस चरण में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए स्पष्ट किया गया है कि मदिरा दुकान/समूह का निष्पादन केवल ई-टेंडर के माध्यम से किया जाएगा, जबकि इस बार ऑक्शन प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त रहेगी। सरकार का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना है।
दोबारा EMD जमा करने की आवश्यकता नहीं
नई व्यवस्था के अनुसार, 10वें और 11वें चरण में आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक प्राप्त उच्चतम ऑफर स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं, जबकि 80% से कम के उच्चतम ऑफर फिलहाल होल्ड पर रखे जाएंगे। ऐसे होल्ड किए गए निविदादाताओं को उसी दुकान के लिए दोबारा EMD जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उन्हें पुनः प्रतिस्पर्धा में भाग लेने में सुविधा मिलेगी।
ऑक्शन व्यवस्था समाप्त; 70% से कम बोली पर रोक, समूह और एकल दुकानों के लिए अलग-अलग निष्पादन से राजस्व बढ़ाने पर फोकस
प्रशासन ने इस चरण में ऑफसेट प्राइस को आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% नीचे तक सीमित कर दिया है। यानी BOQ में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आरक्षित मूल्य के 70% से कम की बोली स्वीकार ही न हो सके। इससे अत्यधिक कम बोली लगाकर दुकानों के आवंटन की संभावना समाप्त होगी।
छोटे निवेशकों को अधिक अवसर
एक और अहम निर्णय के तहत, इस चरण में समूह तथा समूह में शामिल प्रत्येक एकल मदिरा दुकान के लिए पृथक-पृथक ई-टेंडर निष्पादन अनिवार्य किया गया है। माना जा रहा है कि इससे छोटे निवेशकों को अधिक अवसर मिलेगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक है,
राजस्व वृद्धि की संभावना को देखते हुए जिला समितियों को सीमित संख्या में समूहों के पुनर्गठन की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए आबकारी आयुक्त की मंजूरी आवश्यक होगी। साथ ही, जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक है, वहां किसी भी समूह का आरक्षित मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से अधिक नहीं रखा जाएगा।
ई-टेंडर की समय-सीमा 2 अप्रैल
12वें चरण के लिए ऑनलाइन टेंडर डाउनलोड और ऑफर सबमिट करने की समय-सीमा 2 अप्रैल 2026 सुबह 11 बजे से 3 अप्रैल 2026 दोपहर 2 बजे तक निर्धारित की गई है। ई-टेंडर 3 अप्रैल 2026 को दोपहर 2:05 बजे से खोले जाएंगे।
11 चरणों में 15,409.94 करोड़ का राजस्व सुनिश्चित
1,200 समूहों का निष्पादन, आरक्षित मूल्य पर 3.61% और पिछले वर्ष पर 24.34% वृद्धि 29 मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 1,200 समूहों का निष्पादन किया जा चुका है। इन समूहों का कुल आरक्षित मूल्य 14,872.54 करोड़ रुपये था, जबकि प्राप्त ऑफर के आधार पर 15,409.94 करोड़ रुपये का राजस्व सुनिश्चित हुआ है। यह आरक्षित मूल्य की तुलना में 3.61% अधिक तथा पिछले वर्ष 2025-26 के वार्षिक मूल्य की तुलना में 24.34% की वृद्धि दर्शाता है।
राज्य का कुल वार्षिक लक्ष्य
19,952.89 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक 77.23% निष्पादन पूरा हो चुका है। अभी 5,080.35 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य वाले समूह शेष हैं, जिनका निष्पादन 12वें चरण में होना है।
प्रारंभिक चरणों में शानदार प्रतिस्पर्धा, बाद के चरणों में दबाव
पहले तीन ई-टेंडर बैचों में राजस्व वृद्धि 9.5% से 11.6% तक दर्ज की गई, जबकि चौथे और पांचवें चरण में भी सकारात्मक बढ़त बनी रही। हालांकि, छठे चरण से कुछ राउंड में ऑफर आरक्षित मूल्य से नीचे आने लगे। विशेष रूप से नौवें चरण में 17.4% की गिरावट दर्ज की गई, जिसने विभाग को नई रणनीति बनाने के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि 12वें चरण में ऑक्शन समाप्त कर केवल ई-टेंडर और न्यूनतम 70% बोली सीमा तय करने का निर्णय इसी दबाव को संतुलित करने और राज्य के राजस्व हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
राजस्व लक्ष्य हासिल करने में निर्णायक साबित हो सकता है 12वां चरण
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार, शेष समूहों के निष्पादन के लिहाज से 12वां चरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस चरण में प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त होती हैं, तो राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने आबकारी राजस्व लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है।
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