गर्मी के दिन चल रहे हैं, तेज धूप, दिनभर की भागदौड़ से पूरा शरीर में थकान महसूस होती हैं, घर पर वापिस आने के बाद ठंडे पानी से नहाना, लस्सी, छाछ और पना आदि से शरीर की थकान तो कम हो जाती हैं किन्तु मानसिक थकावट बनी रहती हैं। आज हम इसी मानसिक थकावट के बारे में वैज्ञानिक जानकारी सांझा करते हैं। आज की इस भागम भाग वाली दिनचर्या में शरीर जितना श्रम से थका नहीं, उससे कहीं ज्यादा दिनभर कार्यस्थल, नौकरी, धंधे या अन्य सामाजिक दायित्व के निर्णय लेते रहने से मन थक जाता हैं। आजकल थकावट ( फटिग ) केवल शारीरिक कामों से नहीं आती, जितनी थकावट दिनभर में लिए गए छोटे छोटे निर्णयों से आती हैं। दिनभर हम सतत निर्णय लेते रहते हैं कि क्या खाना है, कौनसे कपड़े पहनना हैं, किसको क्या पूछना है, क्या जवाब देना हैं, अब आगे क्यों करना हैं, आदि। इसतरह के इन छोटे छोटे निर्णयों को लेने में हमारी मानसिक ऊर्जा कम होकर थकावट महसूस होती हैं। 

मानसिक थकान के लक्षण -

छोटी छोटी बातों में कन्फ्यूजन होना, गलत निर्णय लेना, ' कुछ भी चलेगा ' जैसी स्थिति होना, बिना भूख कुछ भी खाने की इच्छा होना, मोबाइल पर स्क्रोलिंग बढ़ जाना, चिड़चिड़ापन होना, इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं।

यह सब थकान से ज्यादा निर्णयों के ओवरलोड से होता हैं

दिनभर मोबाइल पर निरंतर नोटिफिकेशन आने से, हमारे हर निर्णय के बहुत से ऑप्शन सहज उपलब्ध होने से, हमेशा अवेलेबल होने की उम्मीद से, व्यक्ति को लगता हैं कि वह स्वयं नियंत्रण में हैं, किन्तु वास्तव में यह मन की ऊर्जा का अपव्यय ही है, जो मानसिक थकान का कारण बनता हैं। इस मानसिक थकान से शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता हैं, जो शरीर में तनाव उत्पन्न करता हैं, इससे ब्लड प्रेशर, हृदय गति बढ़ती हैं, नींद में ख़लल उत्पन्न होता हैं, डायबिटीज का कारण बनता हैं।

इस मानसिक थकान को कम करने के उपाय -

दिनभर की रूटीन फिक्स करें, जिससे दिनभर की छोटी छोटी बातों का निर्णय बार बार नहीं लेना पड़ेगा। हमें लगता हैं हमने दिनभर में बहुत से काम करना हैं, बिजी रहना हैं, यह गलत हैं, कुछ समय के लिए पॉज लेना जरूरी हैं। प्रायोरिटी स्पष्ट रखें, मोबाइल से कुछ समय के लिए दूरी, नोटिफिकेशन बंद कर देना चाहिए। सभी काम महत्वपूर्ण हैं, यह सोच सही नहीं है, कम महत्वपूर्ण कार्यों पर अनावश्यक विचार, अनावश्यक निर्णय लेने से बचें और अपनी मानसिक ऊर्जा को बचाकर फ्रेश महसूस होगा। निर्णय कम और स्पष्टता ज्यादा रखें, आपको मानसिक थकान नहीं होगी। कहते हैं, "अस्वस्थ मन वाला शरीर कभी स्वस्थ नहीं हो सकता हैं, किन्तु स्वस्थ मन वाला शरीर कभी अस्वस्थ नहीं होता हैं।"

डॉ दिनेश चौधरी 
(एम. डी., पी. एच. डी.)
प्रोफ़ेसर,
आयुर्वेद चिकित्सक,
भोपाल