UP: बस से उतरे यात्रियों पर चढ़ा कंटेनर, 6 की मौत
मथुरा|उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य घायल हो गए हैं। सुरीर थाना क्षेत्र के माइल स्टोन 88 के पास एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कंटेनर ने बस से उतरकर खड़े यात्रियों को रौंद दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया है। शवों को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।घटना शनिवार तड़के करीब 2:45 बजे घटी। दिल्ली से कानपुर की ओर जा रही एक बस के कुछ यात्री लघुशंका के लिए एक्सप्रेस-वे पर उतरे थे। हालांकि, बस चालक ने यात्रियों को सुरक्षित 'ग्रीन जोन' में न रोककर सड़क के किनारे ही बस खड़ी कर दी। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार कंटेनर ने पहले तो बस को जोरदार टक्कर मारी और फिर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े यात्रियों को कुचलते हुए आगे बढ़ गया।इस भीषण हादसे में सोनू (औरैया), देवेश (बस्ती), अस्लम (कन्नौज), संतोष (दिल्ली) सहित छह लोगों की मौत हो गई। दो अन्य यात्रियों की शिनाख्त अभी जारी है। सभी मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।प्रशासनिक कार्रवाई और यातायात बहाली: हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मार्ग को सुचारू कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की तलाश जारी है।ड्राइवर की लापरवाही बनी कालप्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बस चालक द्वारा असुरक्षित स्थान पर बस रोके जाने के कारण यह हादसा हुआ। एक्सप्रेस-वे पर निर्धारित 'ग्रीन जोन' में ही वाहनों को रोकने के निर्देश हैं, जिनका पालन न करने पर ऐसे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों और चालकों की लापरवाही से होने वाले हादसों पर चिंता जताई है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा जिले में हुए भीषण सड़क हादसे का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत यात्रियों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि घायलों को सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा मिले और उनकी देखरेख में कोई कोताही न बरती जाए।
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